सच कहा ना?

 एक दिन सब ठीक हो जाएगा का इंतजार 

करते-करते आधी उम्र बीत गई पर अब तक

 कुछ भी ठीक नहीं हुआ बल्कि और उलझ गई

 जिंदगी खुद को दिलासा देते-देते न जाने कितनी

 ख्वाहिश कितनी उम्मीदें मर गई है मेरे अंदर अब 

तो अपनी जिंदगी भी बोझ सी लगती है बढ़ती उम्र

 और बदलते लोगों ने मेरे सारे शौक और मेरे सपने 

मेरी सारी खुशियों को छीन लिया है अब तो कुछ 

चाहने की इच्छा ही नहीं रही सब्र करते-करते जिंदगी 

कब  feeling less हो गई पता ही नहीं चला

 जिंदगी बचपन कितनी जल्दी-जल्दी गुजर गया

 कुछ पता ही नहीं चला ना ठीक से जी पाए न

 दुनियादारी समझ पाए बस सब्र इंतजार करते रह

 गए बोझ जिम्मेदारियां के नीचे दबे रह गए एक दिन

 सब ठीक हो जाएगा इसकी उम्मीद लगाते रह गए

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